
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨बस्ती: खाकी की ‘छाया’ में खाक हो रही जवानी, चिलमा बाजार बना नशे का ‘कैपिटल’🚨
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- “व्हाट्सएप पर ऑर्डर और UPI से पेमेंट: बस्ती में नशा माफिया वीरू सिंह का हाईटेक नेटवर्क, आखिर कब जागेगा प्रशासन?”
- “गरीबों की तबाही और युवाओं की बर्बादी: दुबौलिया में ‘वीरू’ के गांजे के जाल ने उजाड़े कई घर!”
- “बस्ती का ‘नशा कैपिटल’ बना दुबौलिया: सुस्त थानेदार और मस्त माफिया, जवानी की बलि चढ़ा रहा चिलमा बाजार!”
बस्ती। जनपद का दुबौलिया थाना क्षेत्र इन दिनों अपराधियों के हौसले और पुलिस की सुस्ती का गवाह बना हुआ है। ‘अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश’ के दावों को ठेंगा दिखाते हुए नशा माफिया वीरू सिंह ने चिलमा बाजार सहित पूरे इलाके में नशे का ऐसा जाल बुना है, जिसमें इलाके की जवानी घुट-घुट कर दम तोड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा काला साम्राज्य पुलिस की नाक के नीचे नहीं, बल्कि सूत्रों की मानें तो कुछ ‘वसूलीबाज’ सिपाहियों की सीधी सरपरस्ती में फल-फूल रहा है।
🛑हाईटेक हुआ मौत का सौदागर: WhatsApp पर ऑर्डर, UPI से पेमेंट
नशा माफिया वीरू सिंह ने अपने अवैध कारोबार को कॉरपोरेट स्टाइल में अपडेट कर लिया है। अब गांजे की पुड़िया के लिए किसी अंधेरी गली में छिपने की जरूरत नहीं है।
- डिजिटल नेटवर्क: व्हाट्सएप के जरिए ऑर्डर बुक किए जा रहे हैं।
- कैशलेस बर्बादी: पुलिस और जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए पेमेंट के लिए धड़ल्ले से UPI का इस्तेमाल हो रहा है।
- होम डिलीवरी: सब्जी के ठेले, पान की गुमटियां और किराना की दुकानें इस नेटवर्क के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं, जहां से मिनटों में नशे की खेप युवाओं तक पहुंच रही है।
🛑मजबूरी का फायदा: दिहाड़ी पर रखे ‘मोहरे’
वीरू सिंह ने खुद को पर्दे के पीछे रखकर एक ऐसी फौज खड़ी की है जिस पर कानून हाथ डालने से कतराता है। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में यह माफिया बेरोजगार युवकों, बेबस महिलाओं और यहां तक कि दिव्यांगों को दिहाड़ी पर रखकर गांजा बिकवा रहा है। ₹200 से ₹500 के लालच में गरीब परिवार तबाह हो रहे हैं और माफिया की तिजोरियां भर रही हैं।
🛑चिलमा बाजार: खुलेआम बिक रहा जहर
चिलमा बाजार इस समय नशे का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। स्थानीय लोगों में दहशत और आक्रोश दोनों है। आरोप है कि कुछ वसूलीखोर सिपाहियों की “मंथली” बंधी हुई है, जिसके कारण शिकायत करने वालों को ही प्रताड़ित किया जाता है। आखिर क्या वजह है कि एक नशा माफिया पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचा रहा है?
🛑बड़ा सवाल: कब खुलेगी दुबौलिया थानेदार की नींद?
दुबौलिया पुलिस की कार्यशैली पर अब गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।
“क्या साहब को चिलमा बाजार में बिक रही मौत की पुड़िया की गंध नहीं आती? या फिर सब कुछ जानकर भी अनजान बने रहना किसी बड़े ‘हिस्से’ का संकेत है?”
जब जिला प्रशासन नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करता है, तब वीरू सिंह जैसे माफिया का खुला घूमना और पुलिस को चुनौती देना सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाना है। बस्ती के उच्चाधिकारियों को अब खुद इस मामले का संज्ञान लेना होगा, वरना दुबौलिया का यह नशा माफिया आने वाली पूरी पीढ़ी को कब्रिस्तान और जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा देगा।
अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद पुलिस की नींद टूटती है या माफिया का यह ‘डिजिटल नशे का कारोबार’ यूँ ही बेखौफ चलता रहेगा।




















